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झोलवी बना माँ

एक झौलवी के पेट में बड़ा सा ट्यूमर बन गया.... आप्रेशन करवाने हास्पीटल गया.... हास्पीटल में एक लावारिस नवजात शिशु था जिसे कोई गोद लेने को तैयार नहीं था..... झौलवी जब आप्रेशन के बाद होश में आया तो बिस्तर पर वही नवजात शिशु देखा..... डाक्टर ने मुबारकबाद दी कि ताला चाबी ने आपको बेटा अता फरमाया है..... झौलवी हैरान रह गया और कुछ चूं चपड़ करने की कोशिश की लेकिन डाक्टर ने कहा कि ये एक मुअज्जिज़ा है जो मेडिकल साइंस में हजारों सालों में कभी-कभी होता है...... फिर डाक्टर ने कुछ घटनाओं के आधार पर ये सिद्ध किया कि ताला चाबी सर्वशक्तिमान है और ऐसे चमत्कार केवल उन लोगों के साथ होता है जो अपनी नेकियां किसी के सामने प्रकट नहीं करते.... ऐसे लोगों को खुद भी अपनी महानता का पता नहीं होता.... अब झौलवी से कोई जवाब ना दिया गया..... ख़ामोश हो कर बच्चा घर ले आया.....  बच्चा जब जवान हो गया तो एक दिन उसे अकेले में बुला कर झौलवी ने कहा कि बेटा तुम्हें एक जरूरी बात बतानी है...... दिल पर एक बोझ सा है सोचा उतार दूं.... बेटा मैं तुम्हारा बाप नहीं हूँ... ये सुनकर बच्चा हैरान रह गया...... झौलवी ने आगे कहा कि असल में म...

सकीना का मेडिकल स्टोर

ये कहानी उस सकीना की है, जिसका झोलवी 72 के पास रवाना हो चुका था, और सकीना अपनी छोटी बहन तब्बू के साथ जीवन बिता रही थी, तब्बू का झोलवी भी 72 के पास पहुंच चुका था। दोनों बहनें एक मेडिकल स्टोर चलाती थीं, एक दिन लड्डन मेडिकल में कुछ लेने आया, लड्डन बड़े संकोच से मेडिकल में इधर उधर देख रहा था.. सकीना- क्या देख रहे हो…कुछ चाहिए…? लड्डन- वो …वो…जरा केमिस्ट से बात करनी थी… सकीना- मैं ही केमिस्ट हूँ, संकोच मत करो, जो भी चाहिए, स्पष्ट बताओ…मुझे आदत है, मेडिकल चलाते हुए, सब सुनने की… लड्डन- ठीक है…बताता हूँ…. वो क्या है कि मुझे दिन भर खुराखारी करने का मन होता रहता है, कितना भी हाथ चला लूं…मन ही नही भरता…दिन में 5–7 बार तो आम बात है, कभी कभी 10 भी हो जाता है, औजार-ए-मोहब्बत हर वक्त आपे से बाहर ही रहता है…कोई ऐसी दवा दे दो जिससे औजार-ए-मोहब्बत शांत रहे… सकीना सोच में पड़ गयी…पहली बार उल्टा ग्राहक देख रही थी, वरना सभी औजार-ए-मोहब्बत जगाने की दवाई मांगते थे… सकीना- कुछ देर रुको मुझे अपनी बहन तब्बू से सलाह लेनी होगी…तुम पांच मिनट बैठो…मैं आती हूँ। इतना बोल सकीना अंदर चली गयी, जब पांच मिनट बाद लौटी, तो ल...

झोलवी ने लगाई जम्प

एक प्लेन में एक हिन्दू, एक ईसाई और एक झोलवी पास पास बैठे सफर कर रहे थे। झोलवी की जबान जरा साफ नही थी..वो स को श बोलता था.. हजारों फ़ीट की ऊंचाई पे प्लेन अचानक डगमगाने लगा, पायलट में अनाउंस कर दिया कि प्लेन को क्रेश होने से बचा पाना मुश्किल है, तो सभी यात्री अपना अपना पैराशूट लेकर कूद जाएं… सबसे पहले ईसाई ने जम्प किया…कूदते हुए वो चिल्लाया- ओ गॉड सेव मी…. और वो सीधा एक नदी में जाकर गिरा, उसकी जान बच गयी… दूसरे नम्बर पे हिन्दू ने जम्प किया…वो चिल्लाया- है भगवान सेव माय लाइफ…. और वो सीधा एक रुई की फैक्ट्री में रुई के ढेर के ऊपर जा गिरा, उसकी जान भी बच गयी। अब आया झोलवी का नम्बर…कूदते हुए वो चिल्लाया- या ताला चाबी शेव मी और झोलवी सीधा एक नाई के दुकान के कुर्सी में जा गिरा…जहां नाई ने उसकी गन्दी सी बकर दाढ़ी को मूड़ के उसे जानवर से इंसान बना दिया….

झोलवी ने हिस्सा लिया प्रतियोगिता में

एक बार एक प्रतियोगिता झोलवी के गांव में रखी गयी कि किस मियां के घर की बकरी ज्यादा दूध देती है.? जो भी जीतता उसके लिए अच्छा खासा इनाम रखा गया था। झोलवी भी उस प्रतियोगिता में अपनी बकरी को लेकर पहुंच गया… प्रतियोगिता के नियम अनुसार सभी प्रतियोगियों को टाट के बने अस्थायी कमरों में एक एक बाल्टी के साथ अकेले छोड़ दिया गया और कहा गया कि सभी दूध निकालने शुरू करें, साथ ही सभी मियाओं को हिदायत दिया गया कि बकरी बेगम के साथ खुद को अकेला पाकर उसके साथ खुरा खारी में नही लग जाना है, और ऐसा करते हुए जो भी प्रतियोगी पाया जाएगा , उसे प्रतियोगिता से बाहर कर दिया जाएगा। खैर…प्रतियोगिता शुरू हुई…कुछ देर बाद एक एक कर भाग लेने वाले प्रतियोगी दूध से भरी बाल्टी ले लेकर बाहर आने लगे। अंततः सारे प्रतियोगी बाहर आ गए, सिर्फ झोलवी नही आया था, सब इंतजार करने लगे…कई घण्टे बीत गए, झोलवी बाहर ही नही आ रहा था, सभी दर्शकों ने सोच लिया कि झोलवी अभी तक दूध निकाल रहा है, मतलब निश्चित ही वो ही जीतेगा, सबसे ज्यादा वही दुह रहा है… कुछ समय और निकल गया, अब सभी परेशान होने लगे और फैसला किया गया कि अब झोलवी के कमरे में जाकर देखा जा...

झोलवी को हुई बीमारी

झोलवी को एक दुर्लभ बीमारी हो गयी थी जिसका डाक्टरों के पास कोई इलाज नहीं मिल रहा था !! लेकिन एक हकीम ने बताया कि अगर कोई स्त्री एक महीने तक उन्हें अपना दूध पिलाये तो शर्तिया ठीक हो जायेंगा। ये बात जब बिरादरी को पता चली उनकी जान बचाने की खातिर मोहल्ले की एक महिला शबनम को उस पुण्य के लिये तैयार किया गया। झोलवी दूध पीने शबनम के घर पहुँच गया। पाँच मिनट दूध पीने का सिलसिला चला तो एकाएक झोलवी के कान में शबनम धीरे से फुसफुसाई कुछ और चाहिए क्या...? बेचारा झोलवी भावनाओं को समझा ही नहीं और बोला एकाध बिस्कुट हो तो दे दो....

झोलवी ने की अपने तीन बहनों की शादी

झोलवी के तीन बहनों की इकट्ठी शादी हुई। किसी के भी पति की भी उसे हनीमून पर ले जाने की हैसियत नहीं थी। लिहाजा तीनों का अपनी मायके यानी झोलवी के ही घर में तीन कमरों में हनीमून हुआ। रात को झोलवी को बहनों के 'खुशी' की चिन्ता हुई तो वो दबे पांव बड़ी लड़की के कमरे के बन्द दरवाजे पर पहुंचा… सबसे पहले बड़ी लड़की के कमरे के दरवाजे पे झोलवी ने कान टिका दिया, झोलवी को भीतर से बड़ी लड़की के रह-रहकर चीखने की आवाजें आयीं । अब झोलवी मंझली के दरवाजे पर पहुंचा, उसे मंझली लड़की के रह-रह कर हंसने की आवाजें आयीं। फिर आखरी में झोलवी छोटी लड़की के दरवाजे पर पहुंचा। बहुत प्रयास करने के बाद भी वो कुछ सुन न पाया,भीतर से कोई आवाज न आयी। अगले रोज सुबह झोलवी ने बड़ी लड़की से पूछा- “रात को इतना चीख क्यों रही थी ?" "लो !" - जवाब मिला- "दर्द हो तो चीख निकल ही जाती है।" "ये बात तो ठीक है।" -झोलवी बोला, फिर उसने मंझली से पूछा - "रात को हंस क्यों रही थी?" "लो !” – जवाब मिला- “गुदगुदी हो तो हंसी निकल ही जाती है।" “ये भी ठीक है।”-फिर झोलवी ने आखरी में छोटी लड़की स...

झोलवी ने पैदा किया अवैध बच्चा

एक बार झोलवी दार्जलिंग गया। वहां एक अत्यंत सुंदर आदिवासी युवती झोलवी को वो इतनी भायी कि वो उसे पटाने में जुट गया और आखिरकार कामयाब भी हो गया। एक महीना झोलवी वहां रहा और उतना अरसा उसने उस आदिवासी युवती से भरपूर खुराखारी किया। आखिरकार एक दिन वापस वो अपने शहर लौट आया। एक साल बाद फिर झोलवी दार्जिलिंग जाना पड़ा। वहां उसे अपनी पिछले साल वो आदिवासी औरत की याद आई। उसने उसे तलाश किया तो उसे गोद में एक बच्चा खिलाते पाया। "बच्चा !" - झोलवी हैरानी से बोला 'तुम्हारा है।"-युवती बोली 'तुमने मुझे बताया क्यों नहीं।" "तुम क्या कर लेते, बता देती तो ?" "मैं! मैं तुमसे निका कर लेता।" आदिवासी लड़की ने उसने इनकार में सिर हिलाया । "क्यों ? क्या हुआ ?" झोलवी पूछा 'वो क्या है कि "-युवती बोली- “मेरे परिवारवालों को जब मेरी दशा की खबर हुई थी तो सब के सब इकट्ठे हो गए थे और एक लंबी मंत्रणा के बाद यही फैसला हुआ था कि परिवार में एक झोलवी से एक हरामी का होना ज्यादा अच्छा है।'