झोलवी ने की अपने तीन बहनों की शादी

झोलवी के तीन बहनों की इकट्ठी शादी हुई।

किसी के भी पति की भी उसे हनीमून पर ले जाने की हैसियत नहीं थी। लिहाजा तीनों का अपनी मायके यानी झोलवी के ही घर में तीन कमरों में हनीमून हुआ।

रात को झोलवी को बहनों के 'खुशी' की चिन्ता हुई तो वो दबे पांव बड़ी लड़की के कमरे के बन्द दरवाजे पर पहुंचा…

सबसे पहले बड़ी लड़की के कमरे के दरवाजे पे झोलवी ने कान टिका दिया, झोलवी को भीतर से बड़ी लड़की के रह-रहकर चीखने की आवाजें आयीं ।

अब झोलवी मंझली के दरवाजे पर पहुंचा, उसे मंझली लड़की के रह-रह कर हंसने की आवाजें आयीं।

फिर आखरी में झोलवी छोटी लड़की के दरवाजे पर पहुंचा। बहुत प्रयास करने के बाद भी वो कुछ सुन न पाया,भीतर से कोई आवाज न आयी।

अगले रोज सुबह झोलवी ने बड़ी लड़की से पूछा- “रात को इतना चीख क्यों रही थी ?"

"लो !" - जवाब मिला- "दर्द हो तो चीख निकल ही जाती है।"

"ये बात तो ठीक है।" -झोलवी बोला,

फिर उसने मंझली से पूछा - "रात को हंस क्यों रही थी?"

"लो !” – जवाब मिला- “गुदगुदी हो तो हंसी निकल ही जाती है।"

“ये भी ठीक है।”-फिर झोलवी ने आखरी में छोटी लड़की से पूछा- “रात को तेरे कमरे से कोई आवाज क्यों नहीं आ रही थी?"

“लो !” - जवाब मिला- “तुम्हीं ने तो सिखाया था कि मुंह में कुछ हो तो बोलना नहीं चाहिये….."

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